
“रायपुर में स्टांप घोटाले का विस्फोट: कलेक्टर पर सीधे आरोप, CBI जांच की मांग से मचा बवाल!”
रायपुर, Raipur / Chhattisgarh:
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में कथित स्टांप ड्यूटी फ्रॉड को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। एक सामाजिक कार्यकर्ता द्वारा सौंपे गए विस्तृत ज्ञापन में जिला कलेक्टर Dr. Gaurav Kumar Singh की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाते हुए Central Bureau of Investigation (CBI) से पूरे मामले की जांच कराने की मांग की गई है। इस पूरे घटनाक्रम ने प्रशासनिक तंत्र में हलचल पैदा कर दी है और कई स्तरों पर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है।


ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि रायपुर जिले में होम लोन, मॉर्गेज लोन और अन्य प्रकार के वित्तीय लेनदेन में स्टांप ड्यूटी के परीक्षण और सत्यापन को लेकर भारी अनियमितताएं हो रही हैं। आवेदनकर्ता का कहना है कि स्टांप ड्यूटी का सही मूल्यांकन नहीं किया जा रहा, जिससे शासन को भारी राजस्व नुकसान हो सकता है। यह भी दावा किया गया है कि यदि इस पूरे तंत्र की निष्पक्ष और व्यापक जांच की जाए, तो करोड़ों रुपये के राजस्व घोटाले का खुलासा संभव है।
सबसे गंभीर आरोप यह है कि इस विषय पर लगातार आवेदन और मांग के बावजूद जिला प्रशासन द्वारा कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। ज्ञापन में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि स्टांप ड्यूटी परीक्षण की मांग लंबे समय से की जा रही है, लेकिन कलेक्टर स्तर पर इस पर संज्ञान नहीं लिया गया। इस देरी और निष्क्रियता को आवेदनकर्ता ने “संदेहास्पद” बताते हुए इसे बड़े भ्रष्टाचार की आशंका से जोड़ दिया है।
आवेदन में यह भी उल्लेख है कि यदि पूरे Chhattisgarh में स्टांप ड्यूटी की व्यवस्थित जांच कराई जाए, तो शासन को बड़े पैमाने पर राजस्व लाभ हो सकता है। इसके बावजूद जांच प्रक्रिया को आगे न बढ़ाना कई सवाल खड़े करता है। इसी आधार पर कलेक्टर की भूमिका को संदेह के घेरे में रखते हुए CBI जांच की मांग की गई है, ताकि निष्पक्ष तरीके से पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सके।
ज्ञापन सौंपने वाले सामाजिक कार्यकर्ता ने इस मामले को “अत्यंत संवेदनशील” बताते हुए कहा है कि स्थानीय स्तर पर जांच संभव नहीं है, इसलिए किसी स्वतंत्र और केंद्रीय एजेंसी से जांच कराना जरूरी है। उन्होंने अपने आवेदन में यह भी मांग की है कि 15 दिनों के भीतर इस मामले में की गई कार्रवाई और संबंधित जानकारी सार्वजनिक की जाए, ताकि पारदर्शिता बनी रहे।
इस पूरे प्रकरण ने प्रशासनिक व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि आरोपों में सच्चाई पाई जाती है, तो यह न केवल रायपुर बल्कि पूरे राज्य में स्टांप ड्यूटी व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर बड़ा प्रश्नचिह्न होगा। वहीं दूसरी ओर, अभी तक जिला प्रशासन या कलेक्टर Dr. Gaurav Kumar Singh की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, जिससे अटकलों का बाजार और गर्म हो गया है।
राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में भी इस मुद्दे को लेकर चर्चा तेज हो गई है। जानकारों का मानना है कि यदि इस मामले की निष्पक्ष जांच होती है, तो कई बड़े नाम सामने आ सकते हैं और स्टांप ड्यूटी से जुड़े सिस्टम में व्यापक सुधार की जरूरत उजागर हो सकती है।
फिलहाल पूरा मामला आरोपों और मांगों के स्तर पर है, लेकिन जिस तरह से CBI जांच की मांग उठी है, उससे यह स्पष्ट है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा और तूल पकड़ सकता है। अब सबकी निगाहें राज्य सरकार और संबंधित जांच एजेंसियों पर टिकी हैं कि वे इस गंभीर मामले में क्या रुख अपनाती हैं और क्या वास्तव में इसकी उच्चस्तरीय जांच कराई जाएगी या नहीं।
















